इन्सान
इंसानों की इस बस्ती का "इन्सान" कहा है
पुतले ही पुतले है इनमे जान कहा है
मै सोचती हु मुझमे इंसानियत है पर
मेरा भी ईमान कहा है
वो भी इसी बस्ती में कही खो गया
वो मेहमान भी अब मेहमान कहा है
इंसानों की इस बस्ती का "इन्सान" कहा है
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