Thursday, 20 December 2012

इन्सान

इंसानों की इस बस्ती का "इन्सान" कहा  है 

पुतले ही पुतले है इनमे जान कहा है
 
मै सोचती हु मुझमे इंसानियत है पर
मेरा भी ईमान कहा है
 
कुछ पल पहले जो आया था यहा

वो भी इसी बस्ती में कही खो गया


वो मेहमान भी अब मेहमान कहा है

इंसानों की इस बस्ती का "इन्सान" कहा है

Wednesday, 19 December 2012

सोचना तो मुझे ही होगा

अंधकार में डूबा हो चाहे सारा जहाँ
रौशनी को खोजना तो मुझे ही होगा

खंडर सी बिखरी जिंदगी मेरी
इसे आँचल में समेटना तो मुझे ही होगा

मुश्किलें है , कांटे है राहों  में मेरे
फिर भी अंगारों में जलना तो मुझे ही होगा

हमदर्द कोई नही  बनता दुनिया में
अपनी आँख का आंसू पोछना तो मुझे ही होगा

विपरीत परिस्थितिया  क्या डराएंगी मुझे
दृद संकल्प से आगे बढ़ना तो मुझे ही होगा

कहे चाहे जमाना कुछ भी मगर
मुझमे है क्या ये सोचना तो मुझे ही होगा

Saturday, 15 December 2012

Aasma Ki Baaho Me Mujhe Dekhna



Na Chaand Na Sitaro Me Mujhe Dkhna
Na Gulab Na Kinaro Me Mujhe Dekhna

Mujhe Mere Dard Meri Aahon Me Mujhe Dekhna
Agar Tadap Tujhe Jami Pe Na Mile To Aasma Ki Baaho Me Mujhe Dekhna

Friday, 14 December 2012

Ik Boond Hun Mai




Sansaar sagar ki ek boond hun mai

Ik sagar mere andar bahta hai

Apne saath bahne ko kahta hai

Taat(shore) bna liya hai jeevan ko maine

Jo ichha lahro ki maar sahta hai