सोचना तो मुझे ही होगा
अंधकार में डूबा हो चाहे सारा जहाँ
रौशनी को खोजना तो मुझे ही होगा
खंडर सी बिखरी जिंदगी मेरी
इसे आँचल में समेटना तो मुझे ही होगा
मुश्किलें है , कांटे है राहों में मेरे
फिर भी अंगारों में जलना तो मुझे ही होगा
हमदर्द कोई नही बनता दुनिया में
अपनी आँख का आंसू पोछना तो मुझे ही होगा
विपरीत परिस्थितिया क्या डराएंगी मुझे
दृद संकल्प से आगे बढ़ना तो मुझे ही होगा
कहे चाहे जमाना कुछ भी मगर
मुझमे है क्या ये सोचना तो मुझे ही होगा
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